राजस्थान के उदयपुर जिले के सायरा ब्लॉक के पलासमा गांव के पास अरावली पर्वत श्रृंखला की तलहटी में स्थित जरगाजी तीर्थस्थल एक पवित्र तप एवं समाधि स्थल है।
यह स्थल घन जंगल से घिरा हुआ है और यहाँ पौराणिक असंख्य विशाल वृक्ष मौजूद हैं। इस स्थल से नीचे की ओर बनास नदी बहती है, जिसे पार करके इस तीर्थस्थल पर पहुंचा जाता है।
यह ऐतिहासिक व धार्मिक महत्व का विख्यात तीर्थ स्थल है। जहाँ मेवाड़ व मारवाड़ ही नहीं अपितु राजस्थान के हर कोने से मेघवाल समाज सहित विभिन्न समुदायों के लोगों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है।
🌺 जरगा रा धणियों री जय !
राजस्थान के उदयपुर जिले के सायरा ब्लॉक के पलासमा गांव के पास अरावली पर्वत श्रृंखला के बहुत ऊँचे पहाड़ की तलहटी में जरगाजी तीर्थस्थल है। यह तीर्थस्थल घन जंगल से गिरा हुआ है, यहां पौराणिक असंख्य ऊंचे-ऊंचे विशाल वृक्ष मौजूद है। इस स्थल से नीचे की ओर बनास नदी बहती है, जिसे पार करके इस तीर्थस्थल पर पहुंचा जाता है।
जरगाजी का जन्म मेघवाल समाज के एक परिवार में हुआ था। उन्होंने इस पहाड़ी पर तप किया था और बाद में यहीं पर जीवित समाधि ली थी। उनके बाद रघुनाथ पीर (रागु पीर) ने यहां तपस्या की। यह ऐतिहासिक व धार्मिक महत्व का विख्यात तीर्थ स्थल है।
जरगाजी मेघवाल का जन्म सन् 93 में सायरा क्षेत्र के गायफल गांव में वागोणा गौत्र के परिवार में हुआ था। वे बचपन से ही आध्यात्मिक प्रवृत्ति के थे। किशोरावस्था में उनके माता-पिता ने उनका विवाह राजसमंद जिले के काकरवा गांव की हीमी बाई से तय किया। वहाँ जरगाजी ने उनकी होने वाली बहू हिमी बाई से विवाह करने की बजाए उन्हें अपनी धर्म बहन बना लिया।
फाल्गुन वदी चौदस का दिन था, काकरवा से लौटते समय नरवर के जंगल में गुंदाली के समीप जरगाजी को अलख धणी सामने मिले और बोले — "जरगा म्हारा घोड़ा ने पकड़, मैं थोड़ी देर में वापस आता हूं।" बारह वर्ष बाद अलख धणी वहाँ वापस आए और जरगाजी के समर्पण को देखकर प्रसन्न हुए। तो जरगाजी ने कहा — "धोप धणियो री, नाम जरगा रो।" तब से नरवर के पहाड़ी जंगल का नाम जरगा पड़ा।
बाद में जरगाजी ने इस पहाड़ के पश्चिम दिशा में तलहटी को अपना तप स्थल बनाया और यहीं पर जीवित समाधि ली। इसी समाधि पर महाराणा कुंभा ने लगभग 1428 में पाषाण की छतरी का निर्माण करवाया।
जानकारी के अनुसार मेवाड़ के महाराणा मोकल के संतान नहीं थी। संतों ने उन्हें आशीर्वाद स्वरूप पानी का एक कलश (कुंभ) दिया। इसके 9 माह बाद महाराणा मोकल की पत्नि ने पुत्र को जन्म दिया, जिसका नाम महाराणा कुंभा रखा गया।
जरगाजी के समाधि लेने के बाद इस स्थान पर रघुनाथ पीर ने तपस्या की। उन्हें रागु पीर जी भी कहते हैं। उनका जन्म भी गायफल के मेघवाल समाज के वागोणा गौत्र के परिवार में हुआ था। पलासमा गांव के पद्मा जी रिख जी उनके बालगुरु थे।
रागु पीर ने भक्ति करते-करते सिद्धि प्राप्त की। वे बुनकर एवं कारीगरी का काम करने गोड़वाड जाते थे। घाणेराव सरकार द्वारा खण्णी (टैक्स) मांगने पर नहीं दी। रागु पीर जी ने अपने प्रताप से सूखे आम को हरा कर दिया। पीरजी ने शराब को दूध बना दिया, पांचामृत बनाकर संतों को पिला दिया, गंगा प्रकट करवा दी।
यहां हर साल फाल्गुन बदी चौदस (चतुर्दशी) को मेला लगता है। रात्रि 12 बजे गंगा वेरी में गंगा प्रकट होती है। गंगा वेरी से 16 कलश भरे जाते हैं और सप्तधान को पकाया जाता है।
मेले के दिन जरगाजी की छतरी पर दो ध्वजाएं बांधी जाती हैं। एक ध्वजा स्वतः ही बड़ी हो जाती है — अगर लाल रंग की ध्वजा बढ़ती है तो उस साल महिलाओं पर भार बढ़ता है और अगर सफेद रंग की ध्वजा बढ़ती है तो उस साल पुरुषों पर भार बढ़ता है।
🙏 जरगा रा धणियों री जय . . . 🙏
प्रतिवर्ष जरगाजी तीर्थस्थल पर निम्नांकित कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं —
तिथि: हर माह की शुक्ल पक्ष की द्वितीया (बीज)
प्रत्येक माह शुक्ल बीज को जम्मा जागरण का आयोजन किया जाता है जिसमें भजन-कीर्तन एवं सामूहिक आराधना होती है।
तिथि: फाल्गुन वदी चौदस (चतुर्दशी)
यह मुख्य वार्षिक मेला है। रात्रि 12 बजे गंगा वेरी में गंगा प्रकट होती है। ढ़ालोप से सेवा आती है, जिसके पहुंचने पर मेले का शुभारंभ किया जाता है।
तिथि: ज्येष्ठ शुक्ल द्वितीया (जेठी बीज)
जरगाजी के जन्मोत्सव एवं पाटोत्सव का भव्य आयोजन किया जाता है। इस अवसर पर दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए पधारते हैं।
तिथि: फाल्गुन कृष्ण पक्ष की पंचमी
ढ़ालोप में जहां रागु पीर जी ने जीवित समाधि ली, वहां भव्य मेले का आयोजन होता है।
जरगाजी तीर्थस्थल पर जरगाजी की छतरी, रघुनाथ पीर (रागु पीर) की छतरी व बाबा रामदेव जी का मंदिर स्थित है।
वर्तमान में जरगाजी विकास ट्रस्ट (रजि.-7/Udaipur/2005) पलासमा के द्वारा यहां विकास के कार्य करवाए जा रहे हैं। इस ट्रस्ट का गठन 2005 में किया गया। इसके संचालन में 52 गांवों से चुने हुए प्रतिनिधि सदस्य आम सभा का प्रतिनिधित्व करते हैं।
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| खाताधारक | Jargha Ji Vikas Trust JarghaJi |
| खाता संख्या | 51082352550 |
| IFSC Code | SBIN0031430 |
| बैंक | State Bank of India |
🙏 जरगा रा धणियों री जय 🙏




















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