Jargaji Vikas Trust
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Jargaji  ·  Rajasthan
जरगाजी विकास ट्रस्ट (रजि.-7/Udaipur/2005) — सेवा, श्रद्धा, समर्पण
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अपडेट्स
🌸 जम्मा जागरण — हर माह की शुक्ल पक्ष की द्वितीया (बीज)     🌸 जरगाजी जन्मोत्सव एवं पाटोत्सव — ज्येष्ठ शुक्ल द्वितीया (जेठी बीज)     🌸 वार्षिक भव्य मेला — फाल्गुन वदी चौदस     🌸 जरगाजी विकास ट्रस्ट (रजि.-7/Udaipur/2005) पलासमा आपका हार्दिक स्वागत करता है     🌸 दान के लिए संपर्क करें     🌸 जरगा रा धणियों री जय !    

जरगाजी विकास ट्रस्ट (रजि.-7/Udaipur/2005) पलासमा आपका हार्दिक स्वागत करता है

जरगाजी तीर्थस्थल

राजस्थान के उदयपुर जिले के सायरा ब्लॉक के पलासमा गांव के पास अरावली पर्वत श्रृंखला की तलहटी में स्थित जरगाजी तीर्थस्थल एक पवित्र तप एवं समाधि स्थल है।

यह स्थल घन जंगल से घिरा हुआ है और यहाँ पौराणिक असंख्य विशाल वृक्ष मौजूद हैं। इस स्थल से नीचे की ओर बनास नदी बहती है, जिसे पार करके इस तीर्थस्थल पर पहुंचा जाता है।

यह ऐतिहासिक व धार्मिक महत्व का विख्यात तीर्थ स्थल है। जहाँ मेवाड़ व मारवाड़ ही नहीं अपितु राजस्थान के हर कोने से मेघवाल समाज सहित विभिन्न समुदायों के लोगों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है।

🌺 जरगा रा धणियों री जय !

फोटो 1
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📍 जरगाजी तीर्थस्थल — स्थान / Location
🕐 आयोजन
  • जम्मा जागरणशुक्ल बीज
  • वार्षिक मेलाफाल्गुन चौदस
  • जन्मोत्सवजेठी बीज
📍 स्थान
पलासमा गांव,
सायरा ब्लॉक,
उदयपुर जिला,
राजस्थान
🏛️ ट्रस्ट
जरगाजी विकास ट्रस्ट
(रजि.-7/Udaipur/2005)
52 गांवों के प्रतिनिधि
(मेवाड़-मारवाड़)

📜 इतिहास

राजस्थान के उदयपुर जिले के सायरा ब्लॉक के पलासमा गांव के पास अरावली पर्वत श्रृंखला के बहुत ऊँचे पहाड़ की तलहटी में जरगाजी तीर्थस्थल है। यह तीर्थस्थल घन जंगल से गिरा हुआ है, यहां पौराणिक असंख्य ऊंचे-ऊंचे विशाल वृक्ष मौजूद है। इस स्थल से नीचे की ओर बनास नदी बहती है, जिसे पार करके इस तीर्थस्थल पर पहुंचा जाता है।

जरगाजी का जन्म मेघवाल समाज के एक परिवार में हुआ था। उन्होंने इस पहाड़ी पर तप किया था और बाद में यहीं पर जीवित समाधि ली थी। उनके बाद रघुनाथ पीर (रागु पीर) ने यहां तपस्या की। यह ऐतिहासिक व धार्मिक महत्व का विख्यात तीर्थ स्थल है।

जरगाजी मेघवाल का जन्म सन् 93 में सायरा क्षेत्र के गायफल गांव में वागोणा गौत्र के परिवार में हुआ था। वे बचपन से ही आध्यात्मिक प्रवृत्ति के थे। किशोरावस्था में उनके माता-पिता ने उनका विवाह राजसमंद जिले के काकरवा गांव की हीमी बाई से तय किया। वहाँ जरगाजी ने उनकी होने वाली बहू हिमी बाई से विवाह करने की बजाए उन्हें अपनी धर्म बहन बना लिया।

फाल्गुन वदी चौदस का दिन था, काकरवा से लौटते समय नरवर के जंगल में गुंदाली के समीप जरगाजी को अलख धणी सामने मिले और बोले — "जरगा म्हारा घोड़ा ने पकड़, मैं थोड़ी देर में वापस आता हूं।" बारह वर्ष बाद अलख धणी वहाँ वापस आए और जरगाजी के समर्पण को देखकर प्रसन्न हुए। तो जरगाजी ने कहा — "धोप धणियो री, नाम जरगा रो।" तब से नरवर के पहाड़ी जंगल का नाम जरगा पड़ा।

बाद में जरगाजी ने इस पहाड़ के पश्चिम दिशा में तलहटी को अपना तप स्थल बनाया और यहीं पर जीवित समाधि ली। इसी समाधि पर महाराणा कुंभा ने लगभग 1428 में पाषाण की छतरी का निर्माण करवाया।

जानकारी के अनुसार मेवाड़ के महाराणा मोकल के संतान नहीं थी। संतों ने उन्हें आशीर्वाद स्वरूप पानी का एक कलश (कुंभ) दिया। इसके 9 माह बाद महाराणा मोकल की पत्नि ने पुत्र को जन्म दिया, जिसका नाम महाराणा कुंभा रखा गया।

जरगाजी तीर्थस्थल
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🔱 रघुनाथ पीर (रागु पीर) जी का इतिहास

जरगाजी के समाधि लेने के बाद इस स्थान पर रघुनाथ पीर ने तपस्या की। उन्हें रागु पीर जी भी कहते हैं। उनका जन्म भी गायफल के मेघवाल समाज के वागोणा गौत्र के परिवार में हुआ था। पलासमा गांव के पद्मा जी रिख जी उनके बालगुरु थे।

रागु पीर ने भक्ति करते-करते सिद्धि प्राप्त की। वे बुनकर एवं कारीगरी का काम करने गोड़वाड जाते थे। घाणेराव सरकार द्वारा खण्णी (टैक्स) मांगने पर नहीं दी। रागु पीर जी ने अपने प्रताप से सूखे आम को हरा कर दिया। पीरजी ने शराब को दूध बना दिया, पांचामृत बनाकर संतों को पिला दिया, गंगा प्रकट करवा दी।

🎪 वार्षिक मेले की परंपरा

यहां हर साल फाल्गुन बदी चौदस (चतुर्दशी) को मेला लगता है। रात्रि 12 बजे गंगा वेरी में गंगा प्रकट होती है। गंगा वेरी से 16 कलश भरे जाते हैं और सप्तधान को पकाया जाता है।

मेले के दिन जरगाजी की छतरी पर दो ध्वजाएं बांधी जाती हैं। एक ध्वजा स्वतः ही बड़ी हो जाती है — अगर लाल रंग की ध्वजा बढ़ती है तो उस साल महिलाओं पर भार बढ़ता है और अगर सफेद रंग की ध्वजा बढ़ती है तो उस साल पुरुषों पर भार बढ़ता है।

🙏 जरगा रा धणियों री जय . . . 🙏

✍️ ब्लॉग


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🎪 मुख्य आयोजन

प्रतिवर्ष जरगाजी तीर्थस्थल पर निम्नांकित कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं —

🌙 जम्मा जागरण

तिथि: हर माह की शुक्ल पक्ष की द्वितीया (बीज)

प्रत्येक माह शुक्ल बीज को जम्मा जागरण का आयोजन किया जाता है जिसमें भजन-कीर्तन एवं सामूहिक आराधना होती है।

🎡 वार्षिक भव्य मेला

तिथि: फाल्गुन वदी चौदस (चतुर्दशी)

यह मुख्य वार्षिक मेला है। रात्रि 12 बजे गंगा वेरी में गंगा प्रकट होती है। ढ़ालोप से सेवा आती है, जिसके पहुंचने पर मेले का शुभारंभ किया जाता है।

🎊 जरगाजी जन्मोत्सव एवं पाटोत्सव

तिथि: ज्येष्ठ शुक्ल द्वितीया (जेठी बीज)

जरगाजी के जन्मोत्सव एवं पाटोत्सव का भव्य आयोजन किया जाता है। इस अवसर पर दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए पधारते हैं।

🎉 ढ़ालोप का मेला

तिथि: फाल्गुन कृष्ण पक्ष की पंचमी

ढ़ालोप में जहां रागु पीर जी ने जीवित समाधि ली, वहां भव्य मेले का आयोजन होता है।

🏛️ ट्रस्ट के बारे में

जरगाजी तीर्थस्थल पर जरगाजी की छतरी, रघुनाथ पीर (रागु पीर) की छतरी व बाबा रामदेव जी का मंदिर स्थित है।

वर्तमान में जरगाजी विकास ट्रस्ट (रजि.-7/Udaipur/2005) पलासमा के द्वारा यहां विकास के कार्य करवाए जा रहे हैं। इस ट्रस्ट का गठन 2005 में किया गया। इसके संचालन में 52 गांवों से चुने हुए प्रतिनिधि सदस्य आम सभा का प्रतिनिधित्व करते हैं।

🛡️ संरक्षक
  • 1.विजयराम बावल, पाली
  • 2.नेमराज मादरेचा, सेमड़
  • 3.भंवर लाल मेघवाल, उदयपुर
  • 4.प्रेमशंकर मेघवाल, उदयपुर
  • 5.चतराराम नेतरा, पाली
👑 पदाधिकारी
  • अध्यक्ष:  गुलाबचंद पडियार, पुनावली
  • कार्यकारी अध्यक्ष:  पूनाराम बावल, जेमली
  • 1.उपाध्यक्ष:  मोहन लाल सरेर, आंतरी
  • 2.उपाध्यक्ष:  रूप लाल मेघवाल, जसवंतगढ़
  • 3.उपाध्यक्ष:  नाना लाल कटारिया, बोखाड़ा
  • 4.उपाध्यक्ष:  सुरेश मेघवाल, सुआवतों का गुड़ा
  • महामंत्री:  वेणीराम परिहार, नांदेशमा
  • मंत्री:  लक्ष्मण लाल मेघवाल, पलासमा
  • विधि मंत्री:  लक्ष्मी लाल मेघवाल, जरगा आंबा
  • कोषाध्यक्ष:  गुलाबचंद परिहार, सामल
  • उपकोषाध्यक्ष:  मोहन लाल गोयल, जोगीदासजी का गुड़ा
🗂️ संगठन मंत्री
  • 1.मोहन लाल मेघवाल, ढ़िकोड़ा
  • 2.मगन लाल अमलाजिया, झालों का गुड़ा
  • 3.सकाराम राठौड़, पाली
🤝 सलाहकार मंडल
  • 1.वीरमराम भाटी, सादड़ी
  • 2.तुलसीराम मेघवाल, वरदड़ा
  • 3.हजारी लाल धमाणिया, पीपाणा
  • 4.रतन लाल मेघवाल, तरपाल
  • 5.राम लाल मेघवाल, झाड़ोली
  • 6.मोहन लाल पडियार, पुनावली
  • 7.वगताराम मेघवाल, पदराड़ा
  • 8.भंवर लाल सोनिगरा, ढ़ोल
  • 9.राजकुमार परिहार, नांदेशमा
  • 10.मोहन लाल मेघवाल, सायरा
  • 11.मोती लाल परिहार, सिंघाड़ा
  • 12.किशन लाल मेघवाल, सेमड़
  • 13.सवाराम कछवाह, घणावल
  • 14.नारायण लाल मेघवाल, मन्नाजी का गुड़ा
  • 15.वरदाराम मादरेचा, कानजी का गुड़ा
  • 16.मोहन लाल परिहार, गायफल
  • 17.कन्हैया लाल मेघवाल, ब्राहम्णों का कलवाना
  • 18.दौलतराम मेघवाल, सुआवतों का गुड़ा
  • 19.लक्ष्मण लाल मेघवाल, भानपुरा
  • 20.गोपी लाल कटारिया, बोखाड़ा
  • 21.राम लाल कमलवास, विजयबावड़ी
  • 22.भंवर लाल सोलंकी, सेमड़
  • 23.मुकेश परिहार, उदयपुर
  • 24.वक्ताराम मेघवाल, सिंघाड़ा

🏕️ Facility / सुविधाएं

🧘
महंत जी की उपस्थिति
यहां हर समय महंत भैरूदास जी महाराज मौजूद रहते हैं।
🪔
दैनिक आरती
दोनों समय मंदिरों व छतरियों में आरती की जाती है।
🍳
भोजन बनाने की व्यवस्था
यहां भोजन बनाने के लिए आवश्यक बर्तन उपलब्ध हैं।
💧
पानी की व्यवस्था
हर समय भरपूर मात्रा में पानी की उपलब्धता है।
🚿
स्नान की सुविधा
स्नान आदि के लिए उपयुक्त व्यवस्था है।
🛏️
ठहरने की सुविधा
ठहरने के लिए बिना बेड वाले सामान्य कमरे उपलब्ध हैं।

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खाताधारकJargha Ji Vikas Trust JarghaJi
खाता संख्या51082352550
IFSC CodeSBIN0031430
बैंकState Bank of India

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